Saturday ,30th August 2025

कुपोषित प्रदेश में इन्वेस्टर्स की चमक?

 

मोहन सरकार के विज्ञापनों में मध्यप्रदेश निवेशकों की पहली पसंद है। मुख्यमंत्री मंच से बताते हैं कि अरबों-खरबों के एमओयू साइन हो गए, उद्योगपति कतार में हैं, प्रदेश समृद्धि की राह पर है।
लेकिन उसी प्रदेश की सच्चाई यह है कि हर चौथा बच्चा कुपोषित है, हर दूसरी महिला एनीमिक है और हर गाँव का आंगनवाड़ी केंद्र उपेक्षा का शिकार है।

सरकार जहाँ विदेशी डेलीगेशन के स्वागत में रेड कार्पेट बिछा रही है, वहीं दूसरी तरफ आंगनवाड़ी में बच्चों की थालियाँ खाली हैं।66 लाख बच्चों में से 10 लाख कुपोषित और 1.36 लाख गंभीर कुपोषण की गिरफ्त में – यह आँकड़ा निवेशकों के भाषणों में जगह नहीं पाता।

एक तरफ मोहन सरकार कहती है न्यू इंडिया, न्यू मध्यप्रदेश दूसरी तरफ गाँव कहता है “सूखी खिचड़ी, टूटी थाली”। राजधानी के कन्वेंशन हॉल में इन्वेस्टर्स मीट की जगमगाहट है,और गाँव के आंगनवाड़ी केंद्र में धूप-बारिश से जूझते बच्चे हैं।

क्या निवेशकों की तिजोरी भरने से बच्चों का पेट भर जाएगा? क्या अरबों के समझौते कुपोषित बच्चों की हड्डियों पर मांस चढ़ा देंगे?क्या विदेशी पूँजी एनीमिया की दवा बन सकती है? मोहन सरकार का नया मॉडल यही है
बच्चों को पोषण नहीं, निवेशकों को प्रमोशन। कुपोषण से मरता बच्चा कैमरे में जगह नहीं पाता,
लेकिन निवेशक का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री की तस्वीर पहले पन्ने पर चमकती है।

यह प्रदेश फिलहाल दो चेहरों वाला है एक चेहरा है विज्ञापन और इन्वेस्टर्स मीट का चमचमाता चेहरा,
दूसरा चेहरा है कुपोषण से जूझते लाखों बच्चों का। दुर्भाग्य यह है कि सत्ता को पहला चेहरा प्यारा है,
और दूसरा चेहरा जिसे सचमुच देखने की ज़रूरत है । वह आँकड़ों और भाषणों की धूल में दबा पड़ा है।

Comments 0

Comment Now


Total Hits : 315085