राजेंद्र सिंह जादौन
सहज, सरल और मददगार विंध्याचल की मिट्टी से निकला यह अधिकारी: राजेश पांडे, जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश
विंध्याचल की पावन धरा अपने लोगों को संस्कार, संवेदनशीलता और संघर्ष की शक्ति देती है। इसी धरती के सपूत राजेश पांडे ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में रहते हुए भी इंसानियत और मददगार स्वभाव को जिंदा रखा जा सकता है।
राजेश पांडे न केवल एक सक्षम जनसंपर्क अधिकारी हैं, बल्कि एक संवेदनशील और संघर्षशील व्यक्तित्व भी हैं। वे उन चंद अधिकारियों में गिने जाते हैं जिनके दरवाजे आम जनता ही नहीं, बल्कि पत्रकारों के लिए भी हमेशा खुले रहते हैं। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, पर आज के दौर में पत्रकारों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है मान्यता से लेकर सुरक्षा तक। ऐसे समय में राजेश पांडे ने बार-बार यह साबित किया है कि वे सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि पत्रकारों के सच्चे हमदर्द और संरक्षक हैं। जब भी पत्रकारों के अधिकारों पर आंच आई, राजेश पांडे ने बिना किसी हिचकिचाहट के उच्च अधिकारियों के सामने मजबूती से अपनी बात रखी। चाहे मान्यता संबंधी मुद्दे हों, आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता की जरूरत हो, या प्रेस क्लब के हितों का मामला उन्होंने हर बार पत्रकारों के हक में संघर्ष की राह चुनी। सरकारी तंत्र में अक्सर दूरी और औपचारिकता की दीवारें खड़ी हो जाती हैं, लेकिन राजेश पांडे का स्वभाव इन दीवारों को तोड़ता है। वे उन अधिकारियों में से हैं जिनसे मिलने के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं। उनका मानना है कि अधिकारी का असली कर्तव्य जनता और मीडिया की आवाज़ को सही मंच तक पहुंचाना है। यही वजह है कि वे पत्रकारों के लिए हर समय उपलब्ध रहते हैं। चाहे फोन पर मदद हो या व्यक्तिगत मुलाकात में समाधान।
राजेश पांडे की सोच और व्यक्तित्व में विंध्याचल पर्वत की झलक मिलती है। ऊँचाई में दृढ़, पर स्वभाव में विनम्र। उनका काम बोलता है, दिखावा नहीं। वे कठिन हालात में भी मुस्कुराते हुए समाधान खोजते हैं। यही कारण है कि उन्हें प्रशासनिक जगत में विश्वास और पारदर्शिता का चेहरा माना जाता है। आज जब प्रशासनिक व्यवस्था को अक्सर संवेदनहीन कहा जाता है, राजेश पांडे जैसे अधिकारी यह साबित करते हैं कि सरकार और मीडिया के बीच का रिश्ता संघर्ष का नहीं, संवाद और सहयोग का होना चाहिए।
उनकी कार्यशैली का संदेश साफ है "पद पर बैठकर भी आप जमीन से जुड़े रह सकते हैं, बस नीयत साफ और इरादे मजबूत होने चाहिए।"
राजेश पांडे सिर्फ एक नाम नहीं,बल्कि एक प्रेरणा हैं उन अधिकारियों के लिए जो जनता और मीडिया के बीच पुल बनने का सपना देखते हैं।
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