Saturday ,30th August 2025

झंडा या धंधा? औऱ तमाचे की गूंज?

राजेन्द्र सिंह जादौन

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, यह हमारी आज़ादी, हमारे शहीदों और हमारे लोकतंत्र का प्रतीक है। जिस तिरंगे के लिए असंख्य क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, अगर उसी तिरंगे पर सरकारें सौदेबाज़ी करने लगें, तो यह देश के लिए सबसे बड़ा अपमान है। और यही आरोप इन दिनों दिल्ली की भाजपा सरकार पर लग रहे हैं तिरंगे की आड़ में करोड़ों का घोटाला।

हर-घर-तिरंगा या हर-जेब-लाभ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “हर-घर-तिरंगा” अभियान को एक राष्ट्रीय आंदोलन की तरह प्रस्तुत किया था। इसका मक़सद था देशभक्ति की भावना जगाना, तिरंगे को हर नागरिक के घर तक पहुँचाना और जनता में राष्ट्रीय एकता का संदेश देना। लेकिन दिल्ली में इस अभियान ने नया मोड़ ले लिया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि भाजपा की सरकार ने इस अभियान को भी कमीशन और ठेकेदारी के खेल में बदल दिया।

झंडे का साइज भी घोटाले का शिकार

AAP का आरोप है कि टेंडर दस्तावेज़ में झंडे का आकार 900 मिमी × 1350 मिमी और डंडे की लंबाई 6 फुट तय की गई थी। लेकिन जो झंडे वास्तव में लोगों के घर पहुँचाए गए, उनका आकार केवल 711 मिमी × 508 मिमी और डंडे की लंबाई सिर्फ 4 फुट थी।

मतलब यह कि जिस तिरंगे को गरिमा और गौरव का प्रतीक बनकर फहराना था, उसका आकार छोटा कर दिया गया। छोटे आकार का मतलब कम लागत। और कम लागत का मतलब—मुनाफ़ा जेब में। ₹60 के झंडे की जगह ₹15 वाला झंडा बांटा गया। कुल मिलाकर 7 लाख झंडों पर करोड़ों रुपये का खेला

पहले माल, बाद में टेंडर

घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तारीखों से जुड़ा है।
टेंडर 16 अगस्त को खोला गया, जबकि झंडों का वितरण 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से पहले ही हो चुका था। यानी पहले माल बंटा, बाद में काग़ज़ पर नियम पूरे किए गए। इसे अगर सरकारी भाषा में कहा जाए तो यह “पारदर्शिता” है, लेकिन आम जनता की नज़र में यह सीधा फर्जीवाड़ा है।

"तिरंगे पर भी सौदा?"

AAP सांसद संजय सिंह ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि यह घोटाला सिर्फ़ आर्थिक अनियमितता नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे राष्ट्रध्वज का अपमान है। उन्होंने कहा

 “देशभक्ति का ढोंग करने वाली भाजपा ने तिरंगे को भी ठेके और कमीशन में बेच दिया। यह स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।”

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तो इसे और भी तीखा बनाते हुए कहा

 “तिरंगे पर राजनीति, तिरंगे पर व्यापार और अब तिरंगे पर घोटाला… ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।”

वहीं भाजपा ने इस पूरे मामले को निराधार बताया। दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह सब झूठ का व्यापार है और AAP ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि टेंडर पूरी पारदर्शिता से सरकारी पोर्टल पर हुआ था और भुगतान तभी होगा जब सभी नियमों की पुष्टि हो जाएगी।

लेकिन जनता का सवाल अभी भी वहीं हैअगर सब पारदर्शी था तो झंडे का साइज क्यों बदला गया? और सबसे बड़ा सवाल 15 अगस्त से पहले ही झंडे कैसे बंट गए जबकि टेंडर 16 अगस्त को खोला गया?

राष्ट्रभक्ति का बाज़ार

यह घोटाला सिर्फ़ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि भावनात्मक छलावा भी है। जब सरकारें राष्ट्रीय ध्वज को भी ठेकेदारी और लाभ-हानि के तराजू पर तोलने लगें, तो यह बताता है कि राजनीति का पतन किस हद तक हो चुका है।

आज तिरंगा सिर्फ़ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं रहा, यह भाजपा और AAP की बयानबाज़ी का औज़ार बन चुका है। एक तरफ भाजपा इसे “देशभक्ति का प्रतीक” बताती है, दूसरी तरफ़ AAP इसे “घोटाले का प्रतीक” साबित कर रही है।
आम जनता के लिए यह सवाल सबसे अहम है क्या हम देशभक्ति भी अब सरकारी ठेकेदारों और नेताओं की मर्जी पर करेंगे? क्या तिरंगा, जिसे हम सीने पर लगाकर गर्व महसूस करते हैं, वह भी अब नेताओं की जेब भरने का साधन बन गया है।

अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में सरकारें शायद यह भी कहेंगी कि

 

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