प्रेरणा गौतम
(लेखिका -एक साईबर लॉयर है साथ ही पत्रकारिता में पिछले 12 वर्षों से सक्रिय है इसके अलावा साईबर एक्सपड भी है) .
कहते हैं कि इंसान के मुँह में 32 दाँत होते हैं। हर दाँत की अपनी भूमिका होती है काटने वाले सामने, चबाने वाले पीछे, और ऊपर-नीचे मिलकर पूरा सिस्टम दुरुस्त रखते हैं। अगर एक दाँत खराब हो जाए तो पूरा जबड़ा दर्द में आ जाता है।
लेकिन राजनीति में यह नियम लागू नहीं होता। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने तो इस प्राकृतिक व्यवस्था को ही उलट दिया है। यहाँ सारे दाँतों का काम केवल एक ही दाँत से लेने की कोशिश हो रही है मुख्यमंत्री मोहन यादव से।
मोहन जी के पास इतने विभाग हैं कि अगर कोई सामान्य आदमी उतनी ज़िम्मेदारियाँ उठाए तो पक्का दंत-चिकित्सक उसे ओवरबाइट घोषित कर दे। मतलब एक जबड़ा ही पूरे शरीर का बोझ उठा रहा है।
अब सवाल यह है कि बाकी मंत्री क्या कर रहे हैं? जवाब सीधा है वे केवल दिखाने के दाँत हैं। मुस्कुराहट में नजर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, बयान देते हैं, पर काटने-चबाने का असली काम नहीं कर पाते।
विभाग राम भरोसे चल रहे हैं और राज-राम ही है। जैसे कोई मरीज बिना डेंटिस्ट के झोलाछाप इलाज करा रहा हो। जनता चाहती है कि हर दाँत अपने काम पर लगे, पर सरकार ने तो पूरा ब्रश ही एक दाँत पर चला दिया है।
अजीब हाल है जहाँ 32 दाँत बेकार बैठे हों और खाना चबाने की जिम्मेदारी एक ही दाँत को दी जाए, वहाँ पेट भरे या टूटे, अंदाजा आप लगाइए!
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