Thursday ,25th July 2024

गोचर भूमि पर हल चलाना ब्रह्म हत्या के समान है - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन वर्ष 2081 से  घोषित गो रक्षा वर्ष के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ग्राम पंचायत ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर स्थित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य में चल रहें *एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 83 वें दिवस पर गोकथा में पधारे श्रोताओं को  ग्वालसन्त गोपालानन्द सरस्वती महाराज ने बताया कि जिस प्रकार जिला कलेक्टर एवं बड़े व्यापारी सहित विशेष लोग आम लोगों से अपने कार्यालय एवं प्रतिष्ठान में मिलते है और विशिष्ठ लोगों से अपने आवास पर मिलते है उसी प्रकार भगवान आम लोगों से तो मन्दिर में मिलते है और अतिविशिष्ठ लोगों को गोशाला में मिलते है और आप पंच सहस्त्र  गोमाता की कृपा से भगवान के अतिविशिष्ठ व्यक्ति है जो मालवा की धरा में स्थापित एशिया के इस प्रथम गो अभयारण्य में भगवती की एक वर्षीय गो कृपा कथा का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त कर रहें है।


स्वामीजी ने आगे बताया कि इस संसार में जितना भी वात्सल्य प्रगट हुआ है वह भगवती गोमाता की कृपा से हुआ है अर्थात भगवती गोमाता वात्सल्य की खान है। यानि अपने ईष्ट को मिलाने का साधन है गोमाता । कोई कहता है कि मैं तो नास्तिक हूं मैं भगवान को नहीं मानता तो अपने आपको नास्तिक मानने वाले भोजन तो करते है ना तो फिर भगवती अन्नपूर्णा को मान लिया और जब निंद्रा लेते है तो निंद्रा देवी को मान लिया और व्यापार कर जब पैसे गिनते हो तो लक्ष्मी को मान लिया तो फिर किस बात के नास्तिक हो।


स्वामीजी ने आगे बताया कि धरती पर जितने भी पेड़ है, वह सब हमारे मामा की भूमिका निभाते है अर्थात  मामा में दो बार मां आता है यानि पेड़ मां की दुगनी भूमिका निभाता है और हम पैड  काटकर अपने मां के भाई को कुल्हाड़ी मार रहें है। भगवान कृष्ण कहते है कि *वृक्ष परोपकार के लिए जीते अर्थात सर्दी, गर्मी, बरसात, आंधी तूफ़ान के झोकों को सहकर भी वे दूसरों को सुख देते है। जीते भी लकड़ी,मरते भी लकड़ी,देख तमाशा लकड़ी का भजन के माध्यम से पैड का जन्म से लेकर मृत्यु तक क्या महत्त्व है उसकी भूमिका के बारे में स्वामीजी ने बताया साथ ही बताया कि जिसके मन से अंहकार खत्म हो जाता है व ही सत्संग में नाचता है।


स्वामीजी ने बताया कि गोचर में हल चलाना ब्राह्मण की हत्या के बराबर का पाप है* गो और धरती एक ही है। अगर कोई कसाई अपने सामने गाय को काटने के लिए ले जा रहा हो तो उस समय हम चुप बैठ सकते है क्या उसी प्रकार अगर कोई गोचर पर कब्जा कर रहा हो तो उसका भी पुरजोर विरोध करना चाहिए क्योंकि किसी को गोचर पर कब्जा करते देखना भी ब्रह्म हत्या के पाप के बराबर है।
 

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