Monday ,20th May 2024

दो ग़ज़ ज़मीन औऱ लावारिसों के क़फ़न के लिए लड़ता राधेश्याम ?

लेख -राजेंद्र सिंह जादौन 
9893894536 

वैसे तो हर इंसान अपना जीवन सुखी रखने और अपनी पुश्तो को सुखी जीवन जीने धन दौलत ज़मीन सब कमाने में जीवन भर लगा रहता है । 80 साल का राधेश्याम अपनी इस उम्र में भी किसी युवा के जोश से कम नही पड़ता औऱ दिनरात लावारिसों के कफ़न-दफन की जुगाड़ में लगा रहता है । इतना ही नही भूखों को खाना खिलाना ,साथ ही सड़क किनारे ग़रीबो की मदद करना और अपने जीवन को मानव सेवा में समर्पित करना इसका मुख्य उद्देश्य है ।

मानव सेवा और लावारिसों को एक ठिकाना मिल जाये इसके लिए सालों से संघर्ष कर रहा 80 साल का राधेश्याम लेक़िन गरीबो की बात करने वाली सरकार के दामाद ने दो ग़ज़ ज़मीन कागज़ों में ही उलझा रखी है । लेक़िन राधेश्याम भी अपनी इस उम्र के पड़ाव पर भी हार नही मन्ना चाहता औऱ गरीबो के क़फ़न दफ़न भोजन के साथ उनके लिए दो ग़ज़ ज़मीन की जंग लड़ रहा है ।

उम्र मत देखिए जनाब सिर्फ हौसला देखिए कि इस उम्र में भी राधेश्याम अपनो से अपनी बात कर रहा है । और जनता की संवेदनाओ को समझ कर जंसवेदन नाम की संस्था के माध्यम से लोगो तक हर सम्भव मदद पहुँचा रहा है ।

इतना ही नही संस्था के माध्यम से गरीब बच्चों की फ़ीस भरना ,गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग करना भी राधेश्याम के जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण अंग है ।

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