Friday ,24th May 2024

पुलिस की लापरवाही का शिकार बना बेकसूर , सडक दुर्घटना मे घायल

*पुलिस की लापरवाही का शिकार बना बेकसूर , सडक दुर्घटना मे घायल की मदद करना मददगार को पड़ा महंगा ,दुर्घटना स्थल पर भीड़ का दबाव , बहेर जांच ही मददगार पर पुलिस ने कर दी एफआईआर * !

*रिपोर्ट* प्रियंक

उज्जैन - पूरा मामला महिदपुर रोड थाना क्षेत्र का है जहा 21 मई की शाम को बाइक सवार तीन युवक गांव बपैय्या की ओर जा रहे थे। तभी कोयल झुटावद सड़क मार्ग पर अनियंत्रित अज्ञात ट्रैक्टर ने बाइक सवार को टक्कर मार दी जिनमे एक युवक गोविन्द की मौके पर ही मोत हो गई वही उसके साथी कन्हैयालाल और दिलीपसिंह को गंभीर अवस्था में सड़क पर पड़े रहै और दुर्घटना को कार्य करने वाला ट्रैक्टर सवार मौके से फरार हो गया। और पीछे से आ रहे दूसरे ट्रैक्टर सवार दशरथ पाटीदार ने जब इन लोगों को इस अवस्था में देखा तो मदद करने के लिए जैसे ही ट्रैक्टर से उतर आगे बढ़ा और जैसे ही घायलों को सड़क से उठाकर घायलों को अस्पताल के लिए पहुंचाने में लगा तभी उसी दोरान लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी और दशरथ को ही आरोपी समझ उसके ट्रैक्टर में जमकर तोड़फोड़ कर पुलिस के हवाले करते हुवे झूठा प्रकरण दर्ज करवा दिया जबकि असली अज्ञात ट्रैक्टर चालक आरोपी ट्रैक्टर सहित मौके से फरार हो गया था।

आपको बता देगी कि जो लोग दुर्घटना में घायल हुए थे और जिला अस्पताल से छुट्टी होकर घर लौटे तो उन्हें इस बात का पता लगा की असली अज्ञात ट्रैक्टर चालक फरार हैं और जिस निर्दोष ट्रैक्टर चालक दशरथ पाटीदार ने मदद की थी उसे ही महिदपुर रोड पुलिस ने आरोपी बनाते हुए प्रकरण दर्ज कर ट्रैक्टर को थाने में खड़ा करा लिया। हालांकि इस बात को लेकर मृतक का साला देवेंद्र
पहुंचा जहां दुघर्टनाग्रस्त ट्रैक्टर और उसके ड्राइवर का फोटो देखने के उपरांत पूरी घटना का विवरण बताते हुए कहा कि यह ड्राइवर तो सबको बचाने के लिए आया था जिससे दुर्घटना हुई वह अन्य ट्रैक्टर था।
वही फरियादी मृतक गोविन्द के साले देवेंद्रसिंह ने बताया कि मैंने भीड़ के कहने पर एफआईआर दर्ज करवा दी थी। बाद में पता लगा की वह तो मदद करने के लिए आया था बावजूद इसके गलत कार्यवाही की शिकायत करने को लेकर पुलिस थाने पर आवेदन पत्र लेने से मना कर दिया।
वही घायलों के मददगार दशरथ का कहना है कि पुलिस ने भीड़ के दबाव में आकर मेरे खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज किया है  जबकि दुर्घटना करने वाला ट्रैक्टर अन्य था। 
अब सवाल यह उठता है कि सड़क दुर्घटना में घायल अवस्था पड़े व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई राहगीर उसकी मदद करें और उस पर ही पुलिस इस प्रकार से कार्यवाही करेगी तो ऐसी दुर्घटनाओं के समय कौन किसकी मदद करेगा।

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