Friday ,24th May 2024

.मिलावट मुक्त-मध्यप्रदेश’ कांग्रेस सरकार का संकल्प...

.मिलावट मुक्त-मध्यप्रदेश’ कांग्रेस  सरकार का संकल्प...

भोपाल - प्रदेश के  मुख्यमंत्री कमलनाथ  के नेतृत्व मंे मध्यप्रदेश समूचे देश में अग्रणी भूमिका लिये हुए है, चाहे वह प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार देने का विषय हो या पानी के कानूनी अधिकार का। कांगे्रस सरकार प्रदेश के नागरिकों के जीवन से जुडे़ एक संवेदनशील विषय पर दृढ़ता से कदम बढ़ाते हुए एक ओर संकल्प ले रहा है, वह है ‘मिलावट मुक्त-मध्यप्रदेश’ का।
यह कहते हुए हमें बेहद अफसोस हो रहा है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने क्रूर लापरवाही करते हुए मिलावट खोरों के आगे घुटने टेक दिये थे तथा मध्यप्रदेश के नागरिकों की जिंदगी को दाॅव पर लगा दिया था।
तत्कालीन कांग्रेसनीत यूपीए सरकार जब खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम मिलावटखोरी के खिलाफ लेकर आयी थी तो मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने 2012 में इसका जमकर विरोध किया था और मिलावटखोरों के समर्थन में खड़ी हो गयी थी। आज यही कानूनी अधिकार प्रदेश के नागरिकों की खाद्य संरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।
आज समूचे प्रदेश के लगभग हर जिले में दूध और उसके उत्पाद में मिलावट करने वालों के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस बात की कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि बीते कई वर्षों से मध्यप्रदेश में मिलावटखोरी का कारोबार प्रदेश की विगत भाजपा सरकार की सरपरस्ती मंे फलने-फूलने दिया गया था। हाल ही में विभिन्न जिलों में की गई छापेमारी मंे दूध और उसके उत्पादों में क्लोरोफार्म, सोडियमथायो सल्फेट, कास्टिक सोड़ा, माल्टोडेक्स्ट्रिन पाॅवडर, पाॅमोलिन तेल, हाईड्रोजन पेराक्साईड तथा शैम्पू जैसे घातक कैमिकल्स जप्त किये गये हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन के लिए घातक हैं।
मुख्यमंत्री कमलनाथ के स्पष्ट निर्देशों के बाद बीते दिनों  एस.आर. मोहंती जी, मुख्य सचिव, मप्र शासन की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी जिलाधीशों को यह स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये तथा यह अभियान निरंतर जारी रखा जाये। जल्द ही सरकार फल को कैमिकल से पकाये जाने वालों के खिलाफ भी कड़ा और बड़ा कदम उठाने जा रही है।
देश की सर्वोच्च अदालत ने 5 अगस्त, 2016 को अपने आदेश में राज्य सरकारों को यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि सभी राज्य सरकारें हाईरिस्क एरिया को चिन्हित करेगी अर्थात जहां मिलावटखोरी ज्यादा हो रही है, उन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां के सेंपल की अधिक से अधिक जांच की जाये। साथ ही यह भी निर्देशित किया था कि टेस्टिंग लेब की सुविधाएंे सुनिश्चित की जायें। मगर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया।
मध्यप्रदेश में मात्र एक शासकीय खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, ईदगाह हिल्स भोपाल में स्थित है, जिसकी क्षमता 6000 परीक्षण प्रतिवर्ष है। यह चैंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अप्रैल 2016 से दिसम्बर 2018 तक क्षमता नहीं होने की वजह से तत्कालीन भाजपा सरकार ने 13 हजार खाद्य नमूनों का परीक्षण ही नहीं कराया। प्रदेश की कांगे्रस सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है और जल्द ही जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है।
इतना ही नहीं सर्वोच्च अदालत ने जब अपेक्षा की, कि राज्य सरकारें आईपीसी के सेक्शन 272 को संशोधित कर मिलावटखोरी के खिलाफ उम्र कैद की सजा का प्रावधान करे तब तत्कालीन भाजपा सरकार ने एक शपथ पत्र के माध्यम से सर्वोच्च अदालत को सूचित किया था कि वे मिलावटखोरों के खिलाफ आजन्म कारावास तक के दंड को प्रावधानित कर रहे हैं। मगर, सर्वोच्च अदालत में दिये गये शपथ पत्र को भी गंभीरता से न लेते हुए इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं किया।
विगत दिनों एनीमल वेलफेयर बोर्ड आॅफ इंडिया के सदस्य श्री मोहन सिंह आलूवालिया ने मिनिस्ट्री आॅफ र्साइंस एंड टेक्नालाॅजी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि देश में 68.7 प्रतिशत दूध और दूध से बनने वाले उत्पादों में मिलावट होती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि दूध की उत्पादित उपलब्धता 2017-2018 में 375 ग्राम प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है और खपत 480 ग्राम प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है। अर्थात उत्पाद से कहीं ज्यादा अधिक खपत हो रही है।
इतना ही नहीं वल्र्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) ने भारत सरकार को एक एडवाइजरी जारी की है कि अगर दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावटखोरी को तुरंत नहीं रोका गया तो भारत को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और वर्ष 2025 तक भारत के 87 प्रतिशत लोग केंसर जैसी गंभीर बीमारी की ज़द में आ जायेंगे।
मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य बनने जा रहा है, जिसने मिलावट मुक्त मध्यप्रदेश का संकल्प लिया है। हम, सर्वोच्च अदालत के दिशा-निर्देशों के पालन के लिये प्रतिबद्ध हैं और मिलावटखोरों के खिलाफ आजन्म कारावास का प्रावधान करेंगे। प्रदेश के नागरिकों से आग्रह है कि खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम में सभी नागरिकों को धारा-40 के तहत यह अधिकार दिया गया है कि वह भी स्वयं खाद्य पदार्थाें का विश्लेषण करा सकता है। अतः समूचा मध्यप्रदेश, प्रदेश को मिलावटखोरी के दंश से मुक्त कराने के लिए सरकार के इस कदम में सहभागी बने।

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