Friday ,24th May 2024

अश्लीलता के खिलाफ एक जंग

अश्लीलता के खिलाफ एक जंग 
 
बच्चों की जिंदगी बिगाड़, रही है बड़ों की यौन कुंठा 
 
ओमप्रकाश सिंह 
 
अश्लीलता के खिलाफ पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान के अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है।  संस्था उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड के मुख्यमंत्रियों से मांग कर रही है कि भोजपुरी फिल्म्स, ऑर्केस्ट्रा नाचों और भोजपुरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दिनोंदिन फैलती अश्लीलता पर रोक लगाने के लिए एक कड़ा कानून बनाया जाए, और उस पर सख्ती से अमल किया जाए।  संस्था इस प्रतिवेदन पर १० लाख से अधिक लोगों के दस्तखत करा रही है। इस बाबत संस्था इलाहाबाद और पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर रही है।  संस्था के कार्यकर्ता अश्लील लेखकों, गायकों और कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ आईपीसी की धारा २९४ के तहत एफआईआर भी लिखा रहे हैं,  और यू ट्यूब वगैरह पर डाली जानेवाली अश्लील सामग्रियों को ब्लॉक भी करा रहे हैं।  
 
          पूर्वांचल के आर्थिक-औद्योगिक विकास और उसले लिए आवश्यक सांस्कृतिक बदलाव के लिए काम कर रही इस संस्था के सचिव पत्रकार ओम प्रकाश एक बातचीत में बताते हैं-`` अश्लीलता औरतों की अस्मिता पर सीधा हमला है। यह उनके प्रति हिंसा है।  मीडिया , बाजार, सिनेमा सब इस हमले में लगे हैं। सबकी यौन कुंठा तृप्त हो रही है।  सबके स्वार्थ पूरे हो रहे हैं।  भोजपुरी का सवाल अभी हमने प्राथमिकता से इसलिए उठाया है कि भोजपुरी में इन दिनों अश्लीलता इतनी बढ़ गयी है कि दोनों एक-दूसरे के पर्यायवाची हो गए हैं।  हर गाना,औरत के लहंगा, ब्लाउज, पेटीकोट के गिर्द घूमता है, हर संवाद द्विअर्थी होता है, कैमरे का हर कोण औरत के शरीरके कटाव उघाड़ता है। सडकों पर, सार्वजनिक वाहनों में,हर कहीं औरतों का चलना मुश्किल हो गया है।  स्थिति इतनी दूभर है कि बिहार सरकार को पिछले साल आदेश निकलना पड़ा कि किसी भी सार्वजनिक वाहन में कोई भी भोजपुरी गीत नहीं बजाया जा सकता।  पटना हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया कि रात १० बजे के बाद ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। आईपीसी और पुलिस एक्ट में भी अश्लीलता रोकने के प्रावधान हैं।  लेकिन इन पर कहीं कोई प्रभावी अमल नहीं है।  ९० फीसदी भोजपुरी सिनेमा एडल्ट सर्टिफिकेट से पास किया जा रहा है।  कैसेटों, म्यूजिक एलबम्स पर कोई सेंसर की व्यवस्था नहीं है।  और ऑर्केस्ट्रा नाचों वगैरह में किसी पुलिस परमिशन, वेरिफिकेशन वगैरह की कोई जरूरत नहीं है।  इसलिए जिसके जो मन में आ रहा है, वह बेरोक-टोक , मनमानी चलता जा रहा है। 
 
`` इन सबका औरतों की अस्मिता पर तो असर पड़  ही रहा है, उनकी समता-समानता आदि के संवैधानिक संकल्प भी पूरे नहीं किये जा सकते।  परफार्मिंग आर्ट्स की बहुत विशाल धरोहर भी ख़त्म हो रही है।  भाषा और संस्कृति पर भी असर पद रहा है।  और, यौन हिंसा लगातार बढ़ रही है।  डेढ़-दो साल की बच्चियों तक से बलात्कार की खबरें आती हैं।अल्पवयस्क भी यौन हिंसा में संलग्न पाए जा रहे हैं।  पूर्वांचल की एक पीढ़ी अश्लीलता के भंवर में पहले भी डूब चुकी है।  जल्द कुछ नहीं किया गया तो आगे आनेवाली पीढ़ियां भी इस भंवर में डूबती रहेंगी।  यह याद रखने की बात है कि पूर्वांचल के कुछ हिस्से पहले से अश्लीलता प्रभावित रहे हैं, इसलिए वहीं अश्लीलता का कोई उभार बड़ी जटिलताएं खड़ी कर सकता है। '' 
         संस्था अगले तीन महीनों में दो दर्ज़न से ज्यादा जन जागरण सभाएं आयोजित कर रही है।  पहली जनसभा सहीअनिवार्य २८ जुलाई को मलाड, मुंबई में हुई।  जिसमें हिन्दीभाषी समाज के कई जाने-माने लोगों ने भागीदारी की।   `आप अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सुनाना चाहेंगे? `चोली टाईट हो गईल'  या `लॉलीपॉप लागे लू'? क्या यही है भोजपुरी--` मोरे लहंगा आवे रे भूकंप ?'  या कि
`हमरे लहंगा में मीटर लगा दो राजा जी? ' या फिर  `तोहार लहंगा उठा देब रिमोट
से'? `कसम से देह रसगुल्ले  बा'  या  `हाई पॉवर के चुम्बक बाटे इनका दुप्पटा
के पीछे ' जैसे गीतों , ने औरतों को सिर्फ वस्तु बना दिया है। और उसे वस्तु
बनाना रोज दर रोज तेज हो रहा है।'' सभा में जैसे ही यह सवाल उठा, सभा सन्न रह गयी।  लेकिन जल्द ही बातचीत इस संकल्प में बदली कि इस स्थिति का विरोध किया जाएगा। 
महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री श्री कृपाशंकर सिंह ने कहा--`` चुप रहने का वक्त नहीं है।  अश्लीलता  मानवीय मूल्यों और मानवीय संवेदना के खिलाफ है. इसे रोकने के लिए सरकार और समाज दोनों को आगे आना होगा । ''   पद्मश्री शोमा घोष ने कहा-`` यौन कुंठा की अभिव्यक्ति हो रही है।  महिलाओं पर नए सिरे से हमला किया झा रहा है। और, बच्चों का भी भविष्य ख़राब किया जा रहा है।   सभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री श्री चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा--``फूहड़ता की पराकाष्ठा हो गयी है।  संस्कार ख़त्म हो रहे हैं। आँखों की शर्म ख़त्म हो रही है।  प्रतिकार किया जाना चाहिए।  रोक लगवाई जानी चाहिए।  '' 
       एनसीपी माइनॉरिटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सैयद जलालुद्दीन ने कहा--`` अश्लीलता-फूहड़ता से पूरा समाज बदनाम हो रहा है।  इसका समस्त जान जीवन पर असर पड़ रहा है।  पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। ''
इंडिया टीवी की सिनेमा एडिटर रहीं सरिता सिंह ने कहा-``  भोजपुरी फिल्मों में जो कुछ हो रहा है, वह हर औरत को जलील करता है।  जो लोग यू टूब या सोशल मीडिया पर ये विडीओज़ देखते हैं उन्हें लगता है कि शायद पूरब के लोग ऐसे ही होते हैं.'' भाजपा नेता सुमिता सुमन सिंह ने कहा--``स्त्री- पुरुष संबंधों की जो धारणा बचपन में बन जाती है, वही स्थाई हो जाती है।  स्त्री के बारे में कौन सी धारणाएं बनवा रहे हैं हम सब? '' उत्तर क्षेत्रीय महिला मंच की उपाध्यक्ष सुनीता सिंह ने कहा--`` महिलाओं का मानसिक शोषण हो रहा है.  गंदे गानों के चलते न वे परिवार के साथ चल सकती हैं, और न परिवार के लोग उनके साथ चल सकते हैं। '' अधिवक्ता राकेश सिंह ने मांग की कि डांस बार अश्लीलतारोधी कानून जैसा कानून लाया जाए।  भाजपा नेता आर यू सिंह ने कहा--`` दिक्कत समाज के मौन रहने से आयी है।  बोलेंगे तो सब बदलेगा।  '' मुंबई कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री जय प्रकाश सिंह ने कहा--`` समाज इस बारे में अरसे से चिंतित था।  यह बेहतर हुआ है कि हम सब इसकी पहल कर रहे हैं। '' अभिनेता कुणाल ने कहा--``वक्त है कि चेतें हम।'' सबसे मार्मिक आवाज रही विधायक प्रकाश सुर्वे की।  उन्होंने कहा कि गंगा क्षेत्र की संस्कृति से तो देश का मन-प्राण बनता है।   यदि वहां की संस्कृति बिगड़ी तो बनाव कहाँ से आएगा। ''

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