Friday ,24th May 2024

एक रथ पूरी में निकला एक रथ महाकाल में आखिर आशीर्वाद लू किसका

एक रथ पूरी में निकला एक रथ महाकाल में आखिर आशीर्वाद लू किसका

 

लेख - राजेंद्र सिंह जादौन

पूरा देश जहा एक तरफ भगवन जगन्नथ की रथ यात्रा में जुटा था और लोग रथ को खीचने में लगे थे वही महाकाल की नगरी से एक और रथ की शुरुआत हुई ये रथ ढाई करोड़ का था जहा भगवान जगनाथ खुले रथ पर सवार थे तो वही तकनिकी से लेस इस ढाई करोड़ के रथ पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सवार थे जहा एक और भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर अपने भक्तो को आशीष दे रहे थे तो वही आशीर्वाद यात्रा पर निकले शिवराज भी रथ की छत पर से अपने शीर्ष नेता अमित शाह के साथ बीजेपी के भक्तो को आशीष बरसा रहे थे .....

महाकाल की नगरी उज्जैन से प्रारंभ शिवराज सिंह चैहान की यात्रा को जन आशीर्वाद यात्रा को में सिर्फ एक छलावा यात्रा कहुगा इस यात्रा के माध्यम से प्रदेश की जनता को एक बार फिर झूठी घोषणाओं के बल पर छलने के लिये सत्ता लालसा में शिवराज सिंह निकल पढ़े है। जबकि ये चुनावी वर्ष है और विकास की बात करने वाले मुख्यमंत्री को अगर विकास की तनिक भी चिंता है तो क़र्ज़ में दुबे मध्यप्रदेश को क़र्ज़ से उबरना चाहिये न की करोडो के रथ पर सवार होकर करोडो रूपये पानी की तरह बहाना चाहिये चुनावी वर्ष में उन्हें अपनी पार्टी की 15 वर्ष की सरकार का हिसाब व लेखा-जोखा जनता के समक्ष रखना था और पूर्व के अधूरे विकास पर चर्चा करनी थी लेकिन वे तो कह रहे हंै कि हम जनता से सुझाव माँगेंगे, उसे घोषणा पत्र में शामिल करेंगे। 15 वर्ष का कार्यकाल किसी भी प्रदेश को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बनाने के लिये काफ़ी होता है लेकिन आज 15 वर्ष बाद भी प्रदेश की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इतने वर्षों बाद भी आज प्रदेश की जनता को झूठ बोलकर गुमराह किया जा रहा है। प्रदेश में विकास सिर्फ़ प्रचार-प्रसार में है, ज़मीनी धरातल पर नहीं।

 अगर कानूनि व्यवस्थाओं की बात कीजाय तो प्रदेश में बढ़ रहे अपराध को देखते हुए दम तोडती नज़र आती है प्रदेश इन घटनाओं के कारण, देश में प्रदेश को प्रतिदिन शर्मिंदा होना पढ़ रहा है आँकड़ो के हिसाब से प्रदेश में प्रतिदिन 13 के क़रीब दुष्कर्म की घटनाएँ घटित हो रही है। सरकार बहन-बेटियों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। 

  जिस प्रदेश में प्रतिदिन किसान थोड़े से क़र्ज़ के कारण आत्महत्या कर रहा हो, किसानों की मौत का मज़ाक़ उड़ाया जाता हो। किसानो को हक़ माँगने पर  सीने पर गोलियाँ मिलती हो, दोषियों को क्लीनचिट दे दी गयी हो। किसानो को खेती छोड़ने की सलाह दी जाती हो।

  वही प्रदेश में युवा बेरोज़गारी को लेकर बड़ी संख्या में मौत को गले लगा रहा हो। बेरोज़गारी से तंग आकर प्रतिदिन ओसत दो युवा मौत को गले लगा रहे हो। प्रदेश भर में जहा 45 प्रतिशत के क़रीब आबादी कुपोषण की चपेट में हांे। जहा नर्मदा नदी सहित प्रदेश की नदियों का सीना चीरकर अवैध उत्खनन किया जा रहा हो।

इसे में ख़ुद की ब्रांडिंग-प्रचार- प्रसार-अभियान-सम्मेलनों-यात्राओं के नाम पर करोड़ों लुटा कर क़र्ज़ के दलदल में प्रदेश को धकेल दिया हो। ऐसे में भगवान जगन्नाथ के रथ से भी महंगे रथ में बैठने से क्या फायदा ...

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